1984 के सिख कत्लेआम के पीड़ित परिवारों के लिए नौकरियों का केस दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी लड़ेगीः मनजिंदर सिंह सिरसा

AA News
Report : Anil Kumar Attri
New Delhi

नई दिल्ली, 21 दिसंबरः दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऐलान किया है कि 1984 के सिख कत्लेआम के पीड़ित परिवारों के लिए सरकारी नौकरियों का केस अब दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी लड़ेगी।
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श्री सिरसा ने बताया कि पिछले समय के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को हिदायत की थी कि जिन 63 व्यक्तियों को अभी तक नौकरियां नहीं मिलीं, वह नौकरियां प्रदान की जायें पर दो महीने बीतने के बाद भी दिल्ली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

श्री सिरसा ने इन 63 व्यक्तियों की 25 दिसंबर को दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के दफ्तर में मीटिंग बुलाई है जिन व्यक्तियों की अब उम्र हो गई है और वह पारिवारिक सदस्यों को नौकरियंा
दिलाना चाहते हैं, उन्हें अपने दस्तावेजों के साथ 26 और 27 दिसंबर को दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के दफ्तर आने के लिए कहा है।

DSGMC ladegi pidito ka case

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श्री सिरसा ने कहा कि 1984 का सिख कत्लेआम दुनिया का सब से घिनौना अपराध था और पीड़ितों को नौकरियां देना मानवता के आधार पर किये जाने वाला कार्य है पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार जानबुझ कर पीड़ित परिवारों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि अब इन का मामला दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अदालतों में लड़ेगी और हर परिवार के लिए नौकरी सुनिश्चित बनाई जायेगी।

श्री सिरसा ने कहा कि उन्होंने पहले विधानसभा में भी यह मामला उठाया था और सरकार को कहा था कि पीड़ितों के परिवारों को नौकरियां देनी बहुत ही जरूरी हैं जिन्होंने पिछले 35 वर्षों से संताप भोगा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पीड़ित परिवारों को नौकरी नहीं दे सकती तो और न्याय की उम्मीद सरकार से क्या की जा सकती है।

DSGMC Gurudwara Rakabganj Sahib New Delhi

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दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि शिरोमणी अकाल दल ने हमेशा 1984 के सिख कत्लेआम के पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ी है आगे भी जिस तरह की मदद की जरूरत पड़ेगी तो अकाली दल पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि बेशक कानूनी फ्रंट हो या फिर आर्थिक मदद अकाली दल इन पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिला कर डटा रहेगा।

इस मौके पर स. सिरसा के साथ कमेटी के महासचिव हरमीत सिंह कालका, बीबी रणजीत कौर, जगदीप सिंह काहलों, आत्मा सिंह लुबाणा, हरजीत सिंह पप्पा, गुरमीत सिंह भाटिया, सरवजीत सिंह विरक, अमरजीत सिंह पिंकी भी मौजूद थे।


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