सिनेमा हॉल में सांप ने काटा

सिनेमा हॉल में सांप ने काटा
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टाइगर अभी जिंदा है फ़िल्म के शॉ में दर्शक को सांप ने काटा

सिनेमा हॉल कर्मचारियों और अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से किया मना

Cinema hall me snake ne kata

Cinema hall me snake ne kata

हरियाणा के दिल्ली से सटे सोनीपत जिले के पारकर मॉल में बने मुक्ता सिनेमा की बड़ी लापरवाही सामने आई है नेशनल हाईवे पर यह पार्कर मॉल में मुक्ता सिनेमा बना हुआ है अक्सर ग्राहकों से पैसे तो वसूले जाते हैं जिसमें कई तरह के टैक्स और सुरक्षा से जुडे टैक्स जुड़ा होता है लेकिन जब कोई दुर्घटना होती है तो चाहे वह मॉल हो चाहे सिनेमा हॉल हो किसी भी तरह की मदद कस्टमर को नहीं दी जाती हर कस्टमर इतना जागरुक भी नहीं होता और इतनी लड़ाई भी नहीं लड़ पाता कि वह कोर्ट तक जाए और कोर्ट के माध्यम से उस कंपनी से लड़ाई लड़कर अपना हक ले सके क्योंकि कंपनी के अपने वकील होते हैं अपना एक सिस्टम होता है लेकिन गरीब आदमी इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहता वह उसे एक हादसा मान कर छोड़ देता है ऐसी एक बड़ी लापरवाही सामने आई है इस पारकर मॉल में बने मुक्ता सिनेमा हाल में कल ” टाईगर अभी जिंदा है” फिल्म रिलीज हुई और फिल्म की रिलीज के बाद काफी संख्या में कस्टमर्स हॉल में फिल्म देखने के लिए आए लेकिन हॉल में सुरक्षा के कितने इंतजामात में कितनी सफाई थी कितनी व्यवस्था थी उसकी पोल खुल गई जैसे फिल्म शुरू हुई बीच में एक सांप हॉल में आता है और एक दर्शक को काट लेता है. सांप को देखा और अनुभव भी किया तुरंत आसपास की सीटों के लोग भी खड़े हो गए । 10 मिनट के लिए शो को रोक दिया गया और जिसको सांप ने काटा था उस शख्स को हाल से बाहर तक ले जाकर छोड़ दिया गया सांप काफी जहरीला भी हो सकता था कम जहरीला भी हो सकता था लेकिन वहां के कर्मचारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया यहां तक कि इतने बड़े सिनेमा हॉल इतने बड़े सिस्टम ने कोई गाड़ी तक इस पीड़ित को नहीं दी जो उसे अस्पताल तक पहुंचा देती रास्ते में भी हमें कोई घायल मिलता है तो हम अपनी गाड़ी से या किसी दूसरे की गाड़ी भी मंगवा कर या रुकवाकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करते हैं और पहुंचाते भी हैं लेकिन यहां सिनेमा हॉल की बड़ी लापरवाही सामने आई है उसके अंदर हादसा होता है सांप एक दर्शक को काटता है और फिर वह दर्शक बेचारा बाहर सड़क पर दूसरी गाड़ियां ढूंढता है जिसके पांव से खून निकल रहा था सांप ने काटा हुआ था और उसे सदमा भी लगा हुआ था । आखिरकार एक ऑटो किराए पर लेकर यह खुद सोनीपत के सिविल अस्पताल पहुंचा और सिविल अस्पताल में इसका इलाज जारी है । अब जरूरत है सिनेमा हॉल के कर्मचारियों और अधिकारियों पर इस मामले में लापरवाही का मामला दर्ज हो। लेकिन बड़े कारोबारियों कि कहीं ना कहीं पहुंच उपर तक होती है जिन पर पुलिस भी जल्दी हाथ नहीं डालती अभी तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई है और मरीज अभी भी ठीक हो कर घर नहीं पहुंचा बल्कि सोनीपत के सिविल अस्पताल में भर्ती है लेकिन जरुरत है इस पर प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करें और सिनेमा हॉल के खिलाफ मामला दर्ज करें आखिरकार वहां तक सांप आया कैसे आया तो उसके बाद वहां पर क्यों नहीं प्राथमिक उपचार का प्रबंध था क्यों नहीं तुरंत उसे एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया क्या करोड़ों के कारोबार के पास एक गाड़ी भी नहीं थी जो पीड़ित को अस्पताल पहुंचा सके ऐसे हादसे के बाद यदि पीड़ित इलाज से मना करता है तो भी सिनेमा हॉल कर्मचारियों का फर्ज़ होता है कि वह उसे प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचा पुलिस को सूचना दे। यहां ये उपचार की बात तो दूर यहां तक कि सिनेमा हॉल के कर्मचारियों ने प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया प्राथमिक सहायता तक नहीं दी कहीं न कहीं बड़े सवाल खड़े होते हैं।

ये सभी आरोप पीड़ित पक्ष के हैं । सिनेमा हॉल अथॉरटी ने अपना पक्ष नही रखा है । शायद अभी ने सिनेमा हाल इस काटने के निशान को सांप का काटा मानने को तैयार नही है। फिलहाल जरूरत है मामले की जांच की जाए और पुलिस अस्पताल से रिपोर्ट लें कि कुस तरह के जानवर के काटने का निशान है और यदि कोई सिनेमा हाल में एमरजेंसी में डॉक्टरी सहायता मांगता है तो वो क्यो नही मिली । इस शख्स ने डॉक्टरी हेल्प उस वक्त मांगी थी या नही या पीड़ित ने भी शुरुआत में इसे हल्के में लिया था ये जांच का विषय है

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