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Wednesday, September 16, 2026
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SC ST एक्ट पर दो बजे के बाद होगी सुनवाई क्या है पूरा मसला।

· by admin0
Sc St Act matter

AA News
नई दिल्ली ।

कल इस मुद्दे पर देशभर में बंद रहा कई जगह हिसात्मक घटनाये भी हुई। कहि पक्ष तो कही इसके विपक्ष में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है । पूरा सोसल मीडिया कल की घटनाओं से भर गया है ।
सुप्रीम कोर्ट एससी/एसटी ऐक्ट पर केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर आज दोपहर 2 बजे से सुनवाई करेगा। एससी/एसटी एक्ट में हुए बदलावों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई पुर्नविचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तुंरत सुनवाई को तैयार हो गया है।

Sc St Act matter
Sc St Act matter

 इस मामले पर मंगलवार यानि आज दोपहर 2 बजे खुली अदालत में सुनवाई होगी।  मुख्य न्यायाधीश ने इसके लिए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई में बेंच का गठन किया है। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह प्रधान न्यायाधीश से उसी पीठ के गठन का अनुरोध करें जिसने एससी/ एसटी फैसला सुनाया था।
आपको बता दें कि एससी/एसटी अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोमवार (2 अप्रैल) को दलित संगठनों  ने भारत बंद बुलाया था। इस दौरान देश के अधिकतर राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमें लगभग 9 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पंजाब सहित अन्य स्थानों पर आगजनी, गोलीबारी और तोड़फोड़ की खबरों के बीच कई राज्यों ने बंद के मद्देनजर शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया था और संचार एवं रेल समेत परिवहन सेवाएं अस्थायी तौर पर रोक दी थीं। स्थिति पर काबू पाने के लिये प्रशासन को ग्वालियर शहर के चार थाना क्षेत्रों और कुछ कस्बों में कर्फ्यू तथा तीन शहरों में धारा 144 लागू करनी पड़ी।

उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने हापुड़, आगरा, मेरठ, सहरानपुर और वाराणसी में पुलिस पर पत्थर बरसाए और दुकानों को लूट लिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये दिशा-निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 मार्च को दिए अपने आदेश में कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत आरोपियों की गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है और प्रथमदृष्टया जांच और संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बाद ही कठोर कार्रवाई की जा सकती है। यदि प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है तो अग्रिम जमानत देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। इसके पहले आरोपों की डीएसपी स्तर का अधिकारी जांच करेगा। यदि कोई सरकारी कर्मचारी अधिनियम का दुरुपयोग करता है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए विभागीय अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। अगर किसी आम आदमी पर इस एक्ट के तहत केस दर्ज होता है, तो उसकी भी गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसपी या एसएसपी से इजाजत लेनी होगी। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए तर्क से सहमत नहीं है।

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