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Tuesday, September 15, 2026
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बुराड़ी में की थी श्रीकृष्ण भगवान ने एक शादी गांव बना मुरारी, फिर बुराड़ी

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Burari Delhi 110084

बुराड़ी गांव का इतिहास जुड़ा है महाभारत काल से
उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी गांव में बने प्राचीन खांडेश्वर शिव मंदिर के बारे में बताते है । जिसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है । बुराड़ी गांव स्तिथ प्राचीन खांडेश्वर शिव मंदिर के इतिहास को जानने के लिए पांच हजार साल ( यानी महाभारत काल मे जाना ) पीछे जाकर जानना होगा । यह मंदिर बड़ा ही पौराणिक है और इसकी मान्यता भी बहुत ज्यादा है ।

बताया जाता है की महाभारत काल यानी करीब 5000 साल पहले दिल्ली के बुराड़ी गांव का नाम श्री मुरारी गांव हुआ करता था । बुराड़ी गांव में भगवान श्री कृष्ण से जुड़े इस इतिहास के बारे में जानने के लिए बुराड़ी गांव स्तिथ ऐतिहासिक श्री खंडेश्वर नाथ शिव मंदिर में पहुंचे । जिसका जिक्र श्री मदभागवत गीता, महाभारत काल और वेद – पुराण में भी आया है । प्राचीन काल मे यह जगह खंडेश्वर वन के नाम से प्रसिद्ध थी । महाभारत काल मे पांडवों के हिस्से खांडव वन आये थे तो पांडवों ने वनों को हटाकर रहने योग्य बनाया । ऐसी मान्यता है कि उसी दौरान इन वनों में आग लगी थी और अग्नि देवता शांत होने का नाम नही ले रहे थे । तो भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन ने मिलकर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी ।

स्थापना के बाद यहां बरसात हुई और बरसात के बाद यहां सब कुछ हरा भरा भरा हरा भरा हो गया । साथ ही यहां किदवंती है कि भगवान श्री कृष्ण ने यहां पर ब्रह्मा जी के सामने इसी शिव मंदिर में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी 16000 शादियों में एक शादी भी की थी । साथ ही भगवान श्री कृष्णा इस खंडेश्वर वन में अपनी गाय चराया करते थे । और यमुना नदी के किनारे मुरारी घाट पर अपनी गायों को पानी पिलाया करते थे।
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धीरे धीरे समय बदलता गया, कई युग बदले और साथी ही श्री मुरारी गांव का नाम बदलकर आधुनिक युग मे बुराड़ी पड़ गया । बताया जाता है कि करीब सात दशक पहले इस प्राचीन खांडेश्वर शिव मंदिर में ( खंडर मंदिर में ) बारह साल का बालक आया और उसने यही पर रहना शुरू कर दिया । उस बालक का नाम नारायणदत्त देश पांडेय था जिन्होंने इसी मंदिर में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण की और आगे चलकर मंदिर के पुजारी बने ।

साल 1990 में एक बार मंदिर का जीर्णोद्धार कर पुनः स्थापित करने की शुरुआत हुई । जिस तरह इस प्राचीन मंदिर का जिक्र श्री मदभागवत गीता, महाभारत और वेद पुराण में आया है ठीक वैसे ही खुसई के दौरान भगवान शिव से जुड़े कुछ अवशेष ओर पिंड मिले और उन्होंने फिर से यहाँ पर दोबारा शिव मंदिर स्थापित करने के लिए जो शिवलिंग भी मिला । शिवलिंग को ऊपर उठाने के लिए काफी खुदाई की गयी । लेकिन शिवलिंग की आखिर तक नही पहुंचा जा सका ।

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आखिरकार मंदिर के पुजारी श्री नारायणदत्त देशपांडे जी ने यहां 101 ब्राह्मणों द्वारा महायज्ञ कराया और किदवंती है की शिवलिंग खुद ब खुद ही जरूरत के हिसाब से ऊपर उठने लगा और तब जाकर पुनः एक बार फिर भगवान शिव का मंदिर स्थापित हुआ । मन्दिर का वही प्राचीन नाम भी श्री खंडेश्वर नाथ शिव मंदिर रखा गया । मंदिर की सेवा यहां के पुजारी जिन्होंने हमे मंदिर से जुड़ी जानकारियां दी, श्री आचार्य खगेन्द्र कृष्ण जी कर रहे है । इसी के पास एक और मन्दिर स्थापित है जिसका नाम अनादेश्वर श्री शिव मंदिर शनि रखा । क्योकि इस मंदिर के बारे में कोई भी नही जनता की इस मंदिर की स्थापना की युग मे हुई और किसने की। लेकिन इस जगह का नाम जरूर श्री मदभागवत गीता
और महाभारत काल में आया है।

लेकिन इन बातों से यह जरूर साफ होता है कि कहीं ना कहीं जिस तरह इस जगह और मंदिर का नाम श्री मदभागवत गीता, महाभारत, वेद – पुराण में आया है । यह तो सत्य है, लेकिन यहां से लोगों से मिली जानकारी के अनुसार यह सिर्फ एक किवदंती है जो प्राचीनकाल से चली आ रही है।

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