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पंचाल समाज का स्टार भारत पर चल रहे धारावाहिक ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल’’ का विरोध शुरू

by Editor
September 6, 2017
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पंचाल समाज का स्टार भारत पर चल रहे धारावाहिक ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल’’ का विरोध शुरू

Vivadit Dharvahik

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आजकल स्टार भारत पर चल रहे धारावाहिक ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल’’ पांचाल समाज के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इस धारावाहिक में पांचाल शब्द का जो अर्थ निकाला गया है वह पांचाल समाज के लिए एक कलंक से कम नहीं है ये कहना हैं पाँचाल समाज के लोगो का । राजेश पाँचाल ने बताया कि धारावाहिक में दिखाया गया है कि नायक की पांच पत्नियां है जिसकी वजह से उसे कहा जा रहा है कि ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल’’। पांचाल समाज में ऐसी कोई बात या चलन नहीं है बल्कि पांचाल समाज बहुत ही सभ्य ब्राह्मण समाज है। समाज में ये धारणा महाभारत की पात्र द्रौपदी के कारण बनी जो कि महज एक इतिफाक है। असल में द्रौपदी पांचाल प्रदेश के महाराजा द्रुपद की पुत्री थी। पांचाल प्रदेश की राजकुमारी होने के कारण उसे पांचाली कहा गया। आप भी अगर महाभारत का एतिहास पढेंगे तो आपको पता चलेगा कि विवाह के पूर्व ही द्रौपदी को पांचाली कहा गया है। अब उसी महाभारत में एक घटना द्रौपदी के साथ होती है उसका विवाह। इस विवाह में वह महारानी कुन्ती द्वारा कहे गए एक वाक्य के कारण पांचों पाण्वों की पत्नि मानी गई और सामान्य व्यक्ति इसका अर्थ ये लगा बैठा कि पांच पतियों कि पत्नि होने के कारण उसे पांचाली कहा गया है। अब इसी मिथक को लेकर इस काॅमेडी धारावहिक ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल को बनाया जा रहा है और इसको महाभारत की पांचाली का मेल वर्जन का नाम देकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे पांचाल समाज में बहुत रोष है और वो अपना वर्चस्व बचाने के लिए एक जुट होकर इस धारावाहिक का विरोध कर रहे हैं।

Vivadit Dharvahik

नरेश पाँचाल ने बताया कि बता दें कि पांचाल ब्राह्मण समाज का अपना समृद्ध व गौरवशाली इतिहास रहा है। भगवान विश्वकर्मा की पुत्री महान विदुषी बहिष्मति के पति महान सम्राट जिन्हें पृथ्वीपति महाराज प्रियव्रत के नाम से जाना जाता है जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन करते थे। इसके बाद लम्बे समय तक पांचाल प्रदेश में पांचालों का ही शासन रहा। सन् 1003 ये 1159 (156 वर्ष) तक कश्मीर में लोहारवंश (पांचाल ब्राह्मण समाज) का शासन रहा। इतिहास गवाह है कि इस देश में अन्य राजाओं के राज पुरोहित बनने का अधिकार केवल पांचाल ब्राह्मणों को ही प्राप्त था जो एक विशेष सम्मान का परिचायक है। पांचाल ब्राह्मण समाज के सम्मान, उत्कर्ष, विद्वता, वैज्ञानिक कला-कौशल और शक्ति से ईर्षा रखने वाले लोगों ने कालांतर में पांचालों की शक्ति क्षीण होने के बाद एक कुटिल षड्यन्त्र के तहत हमारे इतिहास को बिगाड़ना शुरू कर दिया था।
अब आप को यह तो समझ आ ही गया होगा कि यह गलत सामाजिक धारणा एक सोची समझी साजिश है और किसी भी तरह का इतिहासिक तथ्य इस बात की गवाही नहीं देता कि महाभारत या पांचाल समाज में बहुपति का कोई चलन रहा हो। अब इस धारावाहिक के लेखक, निमार्ता और निर्देशक को ऐसा क्या लगा कि इसका मेल वर्जन बनाना चाहिए। उन्होंने कोई रिसर्च किए बगैर एक समाज के माथे पर कलंक लगाने का काम कर दिया। अब पांचाल समाज ये कैसे सहन करेगा कि निकट भविष्य में पांचाल का मतलब पांच पत्नियों का पति और पांचाली पांच पतियों की पत्नी होती है। यह असहनीय और अभद्र परिभाषा एक सभ्य पांचाल ब्राह्मण समाज कैसे स्वीकार कर सकेगा।

Panchal samaj

इस ऐतिहासिक भूल को स्टार भारत पर दिखाए जा रहे सीरियल ‘‘क्या हाल है मि0 पांचाल’’ के नायक कन्हैया को पांच पत्नी वाला होने के कारण मि0 पांचाल कह कर की जा रही है। अब पांचाल समाज अपने नाम की प्रसिद्धि से खुश होने की बजाय इसके भविष्य में दूरगापी परिणामों को लेकर दुखी है। इस धारावाहिक के कारण पहले से चली आ रही समाज की गलत धारणा को पक्की मोहर लग जाएगी और पूरे विश्व में आगे आने वाली पीढी यही समझेगी कि जो पांच पत्नियों का पति है वह पांचाल और जो पांच पतियों की पत्नी है वह पांचाली। ये तो अर्थ का अनर्थ हो जाएगा यानि इस सीरियल से पांचाल समाज का चरित्र हनन किया जा रहा है। पांचाल समाज के पवित्र इतिहास को दूषित किया जा रहा है। इतना कुछ होते हुए भी पांचाल समाज का धैर्य देखिए कि पांचाल समाज इस धारावाहिक को शान्तिपूर्ण तरीके से रूकवाने का प्रयास कर रहे हैं। पांचाल समाज अपना विरोध प्रर्दशित करने सीरियल के निर्माता से मिले हैं और उन्होंने कहा या तो इस सीरियल का नाम बदलें या इसका कान्सेप्ट बदलें। अब पांचाल समाज की क्या दिशा और दशा इस धारावाहिक से होगी से तो आगे आने वाला समय बताएगा। किसी भी समाज के प्रति इस तरह का कोई भी विवाद हुआ है तो सम्बन्धित समाज एकजुट होकर अपने वर्चस्व के लिए लड़ा है और यही अब पांचाल समाज को भी करना होगा। अगर इस समाज में कोई आपस में अलगाव है तो इसे भुलाकर पांचाल शब्द के अर्थ का अनर्थ होने से बचाने के लिए पांचाल समाज को एकजुट होना पड़ेगा।

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