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Monday, September 28, 2026
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भारत में ‘मौसम कानून’; ज़ीरो ड्राफ्ट तैयार*

· by Editor4
4 min read

​सांसद डॉ. अजित गोपछड़े के संसदीय प्रयासों को सफलता जुलाई 2027 तक कानून लाने का लक्ष्य

​नांदेड

भारत में मौसम संबंधी सेवाओं को एक स्पष्ट और मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की विशेष समिति ने प्रस्तावित मौसम कानून का ‘ज़ीरो ड्राफ्ट’ तैयार कर लिया है। राज्यसभा सांसद डॉ. अजित गोपछड़े द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। संसदीय आश्वासन के अनुसार, जुलाई 2027 तक आगामी प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

​मराठवाड़ा में इस वर्ष बारिश के अंतराल (ड्राय स्पेल) और वर्षा की अनिश्चितता के कारण कृषि के सामने उत्पन्न हुई सूखे जैसी स्थिति, मौसम के सटीक पूर्वानुमान के महत्व को रेखांकित कर रही है। बारिश का बदलता पैटर्न, लंबे सूखे कालखंड और बढ़ते तापमान का सीधा प्रभाव खेती तथा जल भंडारों पर पड़ता है। इसलिए, मौसम में होने वाले बदलावों को भांपकर उसकी सटीक पूर्व चेतावनी मिलना सूखे जैसी स्थिति के प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के मौसम रिकॉर्ड में मराठवाड़ा के लिए लू (हीटवेव) सहित विभिन्न मौसम संबंधी स्थितियों की अग्रिम चेतावनियां दी जाती हैं।

​मौसम का सटीक पूर्वानुमान अब केवल दैनिक जानकारी तक सीमित नहीं रह गया है। कृषि, बिजली उत्पादन एवं वितरण, जलाशय प्रबंधन, परिवहन, नागरिक उड्डयन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों का नियोजन काफी हद तक मौसम के पूर्वानुमान पर निर्भर करता है। इसलिए, आधिकारिक मौसम संबंधी चेतावनियां कौन जारी करेगा, विभिन्न संस्थाओं की क्या जिम्मेदारियां होंगी और निजी मौसम एजेंसियों का काम किन नियमों के तहत चलेगा, इसके लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है।

​संसद में डॉ. गोपछड़े ने उठाए थे मुद्दे
​24 जुलाई 2025 को राज्यसभा में सांसद डॉ. अजित गोपछड़े ने मौसम सेवाओं के लिए एक स्वतंत्र कानूनी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित किया था। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के मौसम कानूनों का अध्ययन, मौसम विज्ञान के क्षेत्र में कुशल जनशक्ति (मैनपावर) उपलब्ध कराने तथा आधुनिक तकनीक की मदद से स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने के लिए अनुसंधान (रिसर्च) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया था।

​इस प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया था कि मंत्रालय ने कानून (विधि) विभाग सहित संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

​जापान, दक्षिण कोरिया के कानूनों का अध्ययन
​विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की सिफारिशों की पृष्ठभूमि में विभिन्न देशों की सर्वोत्तम प्रणालियों (Best Practices) का अध्ययन करके भारत के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। जापान में Meteorological Service Act के तहत ‘Japan Meteorological Agency’ आधिकारिक मौसम चेतावनियां जारी करने वाली प्रमुख संस्था है। दक्षिण कोरिया में भी कानून के अनुसार आधिकारिक मौसम चेतावनियां जारी करने की जिम्मेदारी तय की गई है।

​अनुसंधान और जनशक्ति को भी प्राथमिकता
​मौसम के क्षेत्र में अनुसंधान और जनशक्ति को बढ़ाने के लिए ‘मानसून मिशन’, ‘मिशन मौसम’ और ‘थंडरस्टॉर्म रिसर्च टेस्टबेड’ जैसे उपक्रम चलाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करके युवा शोधकर्ताओं को मौसम संबंधी अनुसंधान में शामिल करने के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
​सूखा प्रबंधन के लिए सटीक पूर्वानुमान की आवश्यकता

​मराठवाड़ा जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में बारिश की मात्रा, उसमें आने वाला खंड, तापमान और उपलब्ध जल भंडार का कृषि पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, आने वाले समय में बारिश का पूर्वानुमान, लंबे शुष्क दौर की अग्रिम सूचना और अतिवृष्टि या लू जैसी स्थितियों की समय पर चेतावनी मिलना प्रशासन और किसानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है। महाराष्ट्र में वर्षा की मात्रा में भौगोलिक और समय के अनुसार बड़े अंतर को राज्य जल संसाधन प्राधिकरण ने भी रेखांकित किया है।


​‘ज़ीरो ड्राफ्ट’ तैयार होने के बाद अब इस मसूदे पर अंतिम चर्चा और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद इसे मंजूरी की अगली प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। मौसम पूर्वानुमान, आधिकारिक चेतावनियां, निजी मौसम एजेंसियों का नियमन और अनुसंधान को कानूनी ढांचा प्रदान करने की दिशा में इस प्रस्ताव को एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

Written by Editor

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