आजादपुर मंडी में आलू में कैमिकल की बात को व्यापारियों ने नकारा।

AA NEWS

DELHI

REPORT – KULDEEP KUMAR

दिल्ली की आजादपुर मंडी में केमिकल आलू बिकने की खबरें लगातार आ रही थी जिससे कि आजादपुर मंडी के ही एक व्यापारी संदीप खंडेलवाल ने मंडी के लोगों के ऊपर यह आरोप लगाया था कि वह केमिकल युक्त आलू बेच रहे हैं जिसको की पहाड़ी आलू का नाम देकर बेचा जा रहा है लेकिन आज कई आलू के व्यापारियों ने बताया कि ऐसा कोई आलू आता ही नहीं है ना ही आलू में किसी भी तरीके का केमिकल मिलाया जा सकता है यह सभी आरोप बेबुनियाद।

 

Azadpur mandi Aalu traders

Azadpur mandi Aalu traders

 

 

दिल्ली एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के सदस्य रामबरन ने बताया कि केमिकल युक्त आलू की खबरों से आलू के व्यापरियों को नुकसान हो रहा है इस तरीके का आलू मार्केट में आता ही नहीं है क्योंकि आलू जमीन के अंदर ही पैदा होता है।

 

 

 

 

 

 

 

और इस समय पूरी दिल्ली में नया आलू कहीं भी नहीं है यह वही आलू है जो कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है और बाद में बिकने के लिए मंडी लाया जाता है, और उसमें कोई भी केमिकल नहीं लगाया जाता। जो शुगर फ्री आलू मिलता है सिर्फ उसी में एक दवा की कोटिंग की जाती है और यह दवा की कोटिंग भी भारत सरकार और यूपी सरकार द्वारा मान्य है।

 

 

 

 

 

 

 

 

आलू जब खेत से कोल्ड स्टोरेज में जाता है और वहां रहने के बाद जब उसको बेकने के लिए बाहर लाया जाता है तो वह दो-तीन मिनट में ही मोशचर छोड़ देता है जिससे कि वह गीला हो जाता है थोड़ा ही गीला होने के बाद जब उसी आलू पर लगी हुई मिट्टी सूख जाती है और ऐसा प्रतीत होता है कि उस पर किसी केमिकल को लगाया गया हो।

 

 

 

 

 

 

 

आगे रामबरन सिंह ने बताया कि दिल्ली एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की लैब है जिसमें आलू की टेस्टिंग की जाती है सभी रिपोर्ट बिल्कुल क्लियर हैं और किसी में भी कोई भी केमिकल नहीं पाया गया है सैंपल भी लैब के लोग खुद ही आकर कलेक्ट करते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2 जुलाई को भी आलू के सैंपल कलेक्ट मंडी से हुए थे और 8 लोगों की दुकानों से यह सैंपल कलेक्ट किए गए थे जिनमें से एक सैंपल खुद संदीप खंडेलवाल की दुकान का था रिपोर्ट भी आ गई है ऑटो के आठों सैंपल में से कोई भी आलू केमिकल युक्त नहीं पाया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दिल्ली एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड और दिल्ली सरकार की तरफ से ही आलू की साल में 4 बार टेस्टिंग की जाती है जिससे कोल्ड स्टोरेज का आलू जब होता है तो टेस्टिंग ज्यादा की जाती है और एक समय होता है कि जब आलू हुए सीधा खेत से बिकने के लिए आता है उस समय टेस्टिंग नहीं हो पाती क्योंकि वह नया आलू होता है और खेत से सीधा लाकर बेच दिया जाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दूसरे व्यापरियों ने भी कहा कि ऐसी खबरों से हमारी सेल में भी कमी आ गई है मीडिया से भी अनुरोध है कि सभी चीजों को सही तरीके से दिखाएं ताकि लोगों में किसी भी तरीके की झूठी अफवाह ना फैल पाए।

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