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Saturday, September 26, 2026
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यमुना किनारे तालाब बनाने की केजरीवाल की स्कीम अटकी

· by admin0
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Govt. Officers and Farmers

यमुना किनारे तालाब बनाने की केजरीवाल की स्कीम अटकी

किसानों ने कहा तालाब के बाद वहां फ़सल नही होगी

लीज पर नही जमीन का अधिग्रहण करें

AA News
Pall Jhangola Delhi

दिल्ली में यमुना किनारे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटते वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट बनाने की बात कही लेकिन किसानों ने इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए अपनी जमीन दिल्ली सरकार को लीज पर देने से साफ मना किया ।
इन मना करने वाले किसानों की संख्या बिल्कुल कम थी शायद दूसरे किसान इनसे सहमत न भी हो।

यमुना किनारे गद्दे घटते वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए खेतों में किसानों से उनकी जमीन लीज पर लेकर 3 साल के लिए पायलेट प्रोजेक्ट लगाने की बात कही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यदि यमुना किनारे जगह-जगह खेतों में खड्डे करके यमुना के पानी को उन गड्ढों में स्टोर किया जाए तो कहीं ना कहीं दिल्ली का वाटर लेवल जरूर बढ़ेगा और लोगों को पानी की किल्लत से राहत मिलेगी लेकिन दिल्ली सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट से दिल्ली के किसान नाराज नजर आए बाहरी दिल्ली के झँगोला पल्ला अकबरपुर माजरा के किसानों ने फ्लड डिपार्टमेंट के उच्च अधिकारियों से बात की उसे मीटिंग की और मीटिंग में अपनी जमीन लीज पर देने से साफ मना कर दिया

Govt. Officers and Farmers

किसानों का कहना है यदि हमने अपना जमीन दिल्ली सरकार को लीज पर दी तो दिल्ली सरकार अपना पायलट प्रोजेक्ट बनाने के लिए हमारी जमीन में करीब 15 मीटर गहरे गड्ढे जरूर करेंगे और उन गड्ढों में यमुना का पानी स्टोर करेंगे लेकिन 3 साल के बाद क्या हमारी जमीन उपजाऊ रह जाएगी क्या हम अपनी जमीन में सिर से फसल उगा सकेंगे ?

और भी कई समस्याओं को सामने रखते हुए फ्लड डिपार्टमेंट के अधिकारियों से किसानों ने एक बात और कही कि यदि हम आपको अपनी यह जमीन ड्रीम प्रोजेक्ट लगाने के लिए दे तो उससे बेहतर होगा कि आप हमारी जमीन को आप अपने अंदर ले ले और इसका जो भी कानूनन मुआवजा है वह हमें दे दिया जाए जिससे हम इस जमीन की तरफ दोबारा नहीं देखेंगे करीब दो करोड़ रुपए प्रति एकड़ जमीन पर सरकार से किसानों ने लेने की बात कही।

अब देखने वाली बात होगी क्या दिल्ली सरकार लोगों की जल की समस्या को खत्म करने के लिए इस ड्रीम प्रोजेक्ट को यमुना किनारे किस तरह लगाएंगे और किस तरह जो किसान हैं और उनको राजी करेंगे। खैर इन मना करने वाले किसानों की संख्या बिल्कुल कम थी शायद दूसरे किसान इनसे सहमत न भी हो।

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