रहस्यमय परसोन मंदिर अरावली की पहाड़ियों में

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आज आपको डबल ए न्यूज़ पर दिखा रहे हैं हम फरीदाबाद की बड़खल झील के पास बने हुआ परसोन मंदिर । यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है और काफी समय से यहां पर भक्तों का आना जाना लगा रहता है। आपको बता दें कि यह प्राचीन मंदिर हजारों साल पुराना बना हुआ है और सबसे बड़ी खासियत यह है कि अरावली पहाड़ियों के बीच में इस मंदिर की स्थापना कई हजार साल पहले हुई। यहां इस परसोन मंदिर के पुजारी की मानें तो इस पुजारी की चार पीढ़ियां यहां पर पूजा पाठ और सेवा में निकल गई है।
सबसे पहले
नारायण दास जी फिर
सोमदास जी उनके बाद
सेवा दास जी और फिर
मदरीका दास जी और अब
अमर दास जी पुजारी है। यहां साधु भिक्षा मांग कर अपनी जीवन गुजर करते हैं । पुजारी बाबा गृहस्थी है और अपने परिवार के साथ रहते है।

Prason Temple

Prason Temple

150 फुट ऊची पहाड़ी है ये
ओर पानी इस मंदिर के कुंड के अलावा इस पहाड़ी पर कही नही है।
हर सावन में यहां हजारो लोग आते है मेला भी लगता है और विशेष भंडारे भी होते है
ये परासर ऋषि की तपोस्थली है और प्रकांड विद्वान परासर के चरणों के निशान भी पत्थरो पर बने हुए हैं ।
आपको बता दें इस मंदिर के पास में एक कुंड बना हुआ है और कुंड के अंदर पानी होता है। यहां के लोगों का कहना यह है कि इस कुंड में नहाने से लोगों के पाप और बीमारियां दूर होती हैं। यहां पर चमड़ी की बीमारियां ठीक हो जाती है जो कष्ट होते हैं उनके निवारण भी हो जाता है।

अस्सी फुट ऊपर बना हुआ अरावली पहाड़ पर ये मंदिर है जहां पर पानी वाला कुंड है लेकिन इन दोनों कुंडों में पानी कभी खत्म नहीं होता ।

यहां के स्थानीय लोगों से जानने की कोशिश की गई तो बताया गया कि इस परसोन मंदिर के पास में पहले कुछ प्राचीन सुरंग थी जो कि अब बंद हो चुकी है और यहां के पुजारी की बात माने तो यहां कुछ सुरंग जो बनी हुई थी उसमें कुछ लोग गए थे और वह वापस से लौट कर नहीं आए। उन्हें ढूंढने की काफी कोशिश की गई उसके आसपास की जमीन को भी खोदा गया वहां से भी उसका रास्ता साफ नहीं हो पाया और ना ही उन व्यक्तियों का पता चल पाया जो सुरंग के अंदर गए थे। थोड़ी दूर डबल ए न्यूज़ की टीम चली तो वहां पर एक व्यक्ति मिला जो काफी सालों से वहां पर सेवा में रहता है । हमने उस व्यक्ति से बात की तो वहां उनकी बातों से पता चला कि यहां पर कोई पुरानी सुरंगे नहीं है बल्कि यहां पर ये सुरंग नही बल्कि नरभक्षी जानवरो की मांद बनी हुई है। अब वह सुरंग है या जानवरो की छुपने मांद बनी हुई है इसके बारे में भी वह साफ नहीं हो पाया है । उसके साथ डबल ए न्यूज़ की टीम ने उन सुरंगों का भी मुआयना किया। करीब 180 फुट की हाइट पर जाने के बाद में वहां पर एक सुरंग जरूर मिली लेकिन वह भी बंद थी अगर उस सुरंग के बारे में बात की जाए तो वह प्राचीन समय से बनी हुई है लेकिन जो वहां पर व्यक्ति मन्दिर में 40 साल से सेवा में है उस की माने तो उसका कहना यह है कि पहाड़ों के बीच से सुरंग बनाना कोई आसान बात नही यह एक इंपॉसिबल काम है।

इसी परसोंन मंदिर के पास एक बहुत विशाल बर्गद का पेड़ है । इस पेड़ का कोई तना नही बल्कि पत्थरो से निकलती उस पेड़ की शाखाएं भी बड़ी आश्चर्य जनक है। इस प्राचीन बर्गद के पेड़ का आज तक कोई भी व्यक्ति तना नही ढूंढ पाया।
इस परसोंन मन्दिर के पास एक प्राचीन इमली के पेड़ के नीचे एक अग्नि का धुना बना हुआ है जो द्वापर युग का बताया जा रहा है ।
इस जगह का नाम इमली वाली गुफा दिया गया है

परसोंन मन्दिर में रहस्यमय जगहों के बारे में डबल ए न्यूज़ की टीम ने खोज की और मंदिर के हर कोने में जाकर हर एक चीज की सर्च की। सर्च करने के बाद में रहस्यमय जगह जरूर देखी लेकिन उनका साफ नहीं हो पाया कि वह सुरंग या कोई गुफा थी तो क्यो बंद की गई या वह सुरंग थी ही नहीं किसी नरभक्षी जानवर के छुपने की मांद बनी हुई थी यह सोचने वाला विषय है

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