तीन घंटे के बच्चे को इलाज नही दे पाए दिल्ली के सरकारी अस्पताल

एक गरीब के नवजात बच्चे की जान नही बचा पाए दिल्ली सरकार के अस्पताल .. संजय गांधी अस्पताल का मामल-वेंटीलेटर का कमी और दूसरे अस्पताल में E रिक्सा जाम में फंसी और नवजात की मौत .. तीन घंटे के नवजात की हुई मौत, ई रिक्शा में लेकर घुमता रहा बेबस पिता … डॉक्टरों पर इलाज की जगह चैटिंग करने के लगाए आरोप … रोहिणी के भीमराव अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम .. दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने उठाए सवाल कहा नवाजत को इलाज तक नही दे सकी दिल्ली सरकार इसलिए केजरीवाल सरकार को छोड़े … अस्पताल के अधिकारी ने ऑफ कैमरा मोबाइल पर जानकारी दी है कि बच्चे को लेकर तीन डॉक्टर्स टीम ने जांच की है बच्चा आया था ठीक था और उसे न वेंटिलेटर की जरूरत थी न बच्चा सिरियश था .. बच्चा सात महीने का प्रीमेचोर था इसलिए अस्पताल में ही रखने को डॉक्टर्स ने बोला तभी एक दुसरे बच्चे को दौरा आ गया और जैसे ही डॉक्टर्स उस दुसरे बच्चे को सम्भालने लगे तभी ये परिवार बच्चे को संजय गांधी अस्पताल से लेकर चला गया … पर सवाल बड़ा है जब बच्चा सिरियश नही था तो परिवार क्यों अस्पताल लाया और क्यों बच्चे की कुछ ही मिनट में मौत हो गई …………
महिला की डिलीवरी एक अनट्रेंड पडोस की महिला ने घर पर ही करवाई नवजात बच्चे की तबियत बिगड़ी तो तुंरत अस्पताल लेकर पहुंचे पर तीन घंटे के नवजात बच्चे को अस्पताल में भर्ती नही किया गया .. पीरागढ़ी कैंप निवासी मनोज की पत्नी तुलसी ने बुधवार सुबह अपने घर पर एक बेटे को जन्म दिया। सुबह करीब 9 बजे जन्म के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ थी। इसलिए परिजन उसे संजय गांधी मैमोरियल अस्पताल लेकर पहुंचे। जैसा कि मनोज के पिता पूरन सिंह ने बताया, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पहले तो बच्चे को दूर से देखा। डॉक्टर कुर्सी पर बैठे थे और आपस में हंसी मजाक कर रहे थे। इसी बीच जब पूरन और मनोज ने डॉक्टरों से इलाज के बारे में बोला तो उनमें से एक डॉक्टर ने कहा कि यहां वेंटीलेटर नहींंहै। इसलिए बच्चे को तत्काल लेकर भीमराव आंबेडकर अस्पताल पहुंचे। वहां उपचार जल्दी मिल जाएगा। परिजनों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन की ओर से उस वक्त एंबुलेंस तक उपलब्ध नहींंकराई गई। ई रिक्शा में बैठ परिजन ट्रैफिक से होते हुए रोहिणी स्थित भीमराव आंबेडकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक उनका नवजात शिशु दम तोड़ चुका था।
पूरन ने बताया कि गर्भ धारण करने के बाद से ही तुलसी का उपचार संजय गांधी मैमोरियल अस्पताल में चल रहा था। बीते तीन दिन से उसे काफी लेबर पेन हो रहा था, लेकिन डॉक्टर दर्दनिवारक गोली देकर घर जाने को बोल देते थे। बुधवार सुबह जब तुलसी को तेज दर्द हुआ था तो पास में ही एक दाई हैं, उन्हें बुलाकर प्रसूति कराई गई थी। इसी बीच पता चला कि प्रसूति सात महीने की होने की वजह से ही बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।
इस घटना पर दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली सरकार पर सवाल खड़े किये है कि सरकार के अस्पताल एक नवजात को भी इलाज नही दे सके इसलिए मौजूदा सरकार को ये सरकार छोड़ देनी चाहिए …
अस्पताल के अधिकारी वर्जन के लिए अस्पताल में नही मिले तो MS PS नैयर ने AA News को मोबाइल पर जानकारी दी है कि बच्चे को लेकर तीन डॉक्टर्स टीम ने जांच की है बच्चा आया था ठीक था और उसे न वेंटिलेटर की जरूरत थी न बच्चा सिरियश था .. बच्चा सात महीने का प्रीमेचोर था इसलिए अस्पताल में ही रखने को डॉक्टर्स ने बोला तभी एक दुसरे बच्चे को दौरा आ गया और जैसे ही डॉक्टर्स उस दुसरे बच्चे को सम्भालने लगे तभी ये परिवार बच्चे को संजय गांधी अस्पताल से लेकर चला गया … पर सवाल बड़ा है जब बच्चा सिरियश नही था तो परिवार क्यों अस्पताल लाया और क्यों बच्चे की कुछ ही मिनट में मौत हो गई ………….. साथ ही इस सदी में इस तरह दाई जो घरेलू औरत सहयोग करती उसके द्वारा डिलीवरी करवाना फिर देश की राजधानी में तीन घंटे की उम्र के बच्चे को इलाज नही मिल पाना पूरे समाज और सरकारों के लिए कलंक से कम नही है …
अनिल अत्तरी दिल्ली

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